Essay About Mahatma Gandhi In Hindi Language - निबंध महात्मा गाँधी के बारे में


Essay About Mahatma Gandhi In Hindi Language

Mahatma Gandhi

Essay About Mahatma Gandhi In Hindi Language - निबंध महात्मा गाँधी के बारे में

जानते है महात्मा गाँधी के बारे में निबंध (Know About Mahatma Gandhi in Hindi Essay) के द्वारा महात्मा गाँधी ये नाम अपनेमे ही बोहत बड़ा है और पुरे विश्व में यह नाम विख्यात है इन्हे हर एक मनुष्य जानता है इनकी ख्याति इतनी बड़ी है की किसी से भी पूछने के बाद वो कहेगा की वो उन्हें जानता है। महात्मा गाँधी बोहत ही साधे भगवान पर विश्वास करने वाले व्यक्ति थे उनके जुबान पर हमेशा राम नाम रहता ही था। उनके बारे में हर एक व्यक्ति जानना चाहता है इस लेख में हम आपको उनके जीवन की सारी जानकारी देंगे चलिए जानते है महात्मा गाँधी जी के बारे में।

Learn Information About Mahatama Gandhi In Hindi - महात्मा गाँधी के बारे में पढ़े

1 महात्मा गाँधी जी का जन्म
2 महात्मा गाँधी जी के माता पिता का नाम
3 महात्मा गाँधी जी के अर्धांगिनी का नाम।
4 उनकी दक्षिण अफ्रीका की जीवन की यात्रा
5 गाँधी जी भारत लौटे
6 गाँधी जी का पहला सत्याग्रह
7 असहयोग आंदोलन
8 चौराचौरी की हिंसा
9 गाँधी जी की दांडी यात्रा
10 गाँधी-इरविन समझोता
11 क्रिस्प प्रस्ताव
12 भारत छोड़ो आंदोलन
13 भारत को स्वतंत्रता मिली
14 गाँधी जी की हत्या

* महात्मा गाँधी जी का जन्म

महात्मा गांधी का जन्म पोरबंदर में 2 अक्टूबर, 1869 को हुआ था, जो कि भारत के गुज्जर राज्य का एक दूरवर्ती राज्य था।

* महात्मा गाँधी जी के माता पिता का नाम

महात्मा गांधी के पिता का नाम श्री करमचंद गांधी और माता पुतलीबाई थीं।

* महात्मा गाँधी जी के अर्धांगिनी का नाम

महात्मा गाँधी जी के अर्धांगिनी का नाम कस्तूरबाई मकनजी था वह 13 साल की थीं।

* उनकी दक्षिण अफ्रीका की जीवन की यात्रा

लन्दन में 1888 और 1891 में कानून का अध्ययन करने के बाद वो 1893 में दक्षिण अफ्रीका गए जहां उन्होंने अपना कानून कार्यालय खोला।

1906 में महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में इस कानून के विरोध में सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया कि सभी भारतीयों पर उंगली उठाई जाए और एक पहचान पत्र भी रखा जाए। इस सविनय अवज्ञा आंदोलन में वे हजारों भारतीयों के साथ शामिल हुए थे।

* गाँधी जी भारत लौटे

गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से 1915 में भारत लौट आए। उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु, गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर भारत का दौरा करने में एक साल बिताया।

दौरे को पूरा करने पर, गांधी ने अहमदाबाद शहर के बाहरी इलाके में साबरमती नदी के तट पर बसना चुना, जहां उन्होंने सत्याग्रह आश्रम खोला।

* गाँधी जी का पहला सत्याग्रह

भारत में, गांधी ने गरीब किसानों के अनुरोध पर चंपारण में पहला सत्याग्रह शुरू किया क्योंकि उन्हें ब्रिटिश इंडिगो प्लांटर्स ने अपनी जमीन के 15% हिस्से पर इंडिगो उगाने के लिए मजबूर किया था और फिर किराए के बदले में पूरी फसल के साथ हिस्सा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सत्याग्रह ने ब्रिटिश सरकार को किसानों की स्थितियों का मूल्यांकन करने के लिए एक जांच स्थापित करने के लिए मजबूर किया। एक समिति का गठन किया गया, जिसमें गांधी भी एक हिस्सा थे और समिति ने किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया। भारत में पहले सत्याग्रह आंदोलन की सफलता ने भारत में गांधी की लोकप्रियता को बढ़ाने में एक बड़ी भूमिका निभाई।

* असहयोग आंदोलन

1920 में लाला लाजपतराय की अध्यक्षता में हुवे कलकत्ता अधिवेशन में गाँधी जी की नेतृत्व में असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव पारित हुवा। इस आंदोलन के दौरान विद्यार्थीयो द्वारा शिक्षण संस्थावो का बहिस्कार ,वकीलों द्वारा न्यायालयों का बहिष्कार और गाँधी जी द्वारा 'केसर -ए-हिन्द की उपाधि वापस की गई।

* चौराचौरी की हिंसा

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित चौरी-चौरा नाम के स्थान पर 5 फरवरी ,1922 ई. को आंदोलनकारी भीड़ ने पुलिस के 22 जवानो को थाने के अंदर जिन्दा जला दिया था। इस घटना से गाँधी आहत हो गए और उन्होंने 12 फरवरी ,1922 ई. को असहयोग आंदोलन वापस लिया।

गांधी जी ने अपना समय हिंदू-मुस्लिमों के बीच एकता, महिलाओं की समानता, अछूतों की अवधारणा को हटाने और हाथ से कताई की लोकप्रियता बढ़ाने जैसी बुनियादी जरूरतों के प्रसार के लिए समर्पित किया।

* गाँधी जी की दांडी यात्रा

इसे नमक सत्याग्रह के रूप में भी जाना जाता है। अपने 78 अनुयायियों के साथ गाँधी जी ने साबरमती आश्रम से 12 मार्च ,1930 ई. को दांडी के लिए यात्रा आरम्भ की। 24 दिन की लम्बी यात्रा के पश्चात 5 अप्रैल ,1930 ई. को दांडी में पहुंचकर गाँधी जी ने सांकेतिक रूप से नमक कानून तोडा और सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारम्भ किया |

ऐतिहासिक दांडी मार्च ने पूरे देश को कानून की व्यापक अवहेलना शुरू करने की शक्ति दी और सविनय अवज्ञा आंदोलन ’शुरू करने में मदद की। कुछ हफ़्ते के भीतर, हजारों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया और साम्राज्य को आगे बढ़ाते हुए जेल में डाल दिया गया। वायसराय लॉर्ड इरविन को गांधी के साथ बातचीत करने के लिए मजबूर किया गया और 5 मार्च, 1931 को गांधी इरविन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद, गांधी पहले गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए इंग्लैंड रवाना हो गए।

* गाँधी-इरविन समझोता

महात्मा गाँधी और वायसराय इरविन के मध्य 5 मार्च ,1931 को एक समझोता हुवा जिसे गाँधी-इरविन समझोता के नाम से जाना जाता है। इस समझोते के फलस्वरूप कांग्रेस ने अपनी तरफ से सविनय अवज्ञा आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की तथा गाँधी जी द्वितीय गोलमेज में भाग लेने को तयार हुवे। इसे दिल्ली समझौता भी कहा जाता है।

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* क्रिस्प प्रस्ताव

1942 ई . में जापानी फौजो के रंगून पर कब्जा कर लेने से भारत की सीमाओं पर सीधा खतरा पैदा हो गया। अब ब्रिटेन ने भारत का युद्ध में सक्रिय सहयोग पाने के लिए युद्धकालीन मंत्रिमंडल के एक सदस्य स्टैफोर्ड क्रिस्प की घोषणा के मसविदे के साथ भारत भेजा।

क्रिस्प प्रस्ताव की प्रमुख शिफारिशें इस प्रकार थी। युद्ध के बाद एक ऐसे भारतीय संध के निर्माण का पर्यटन किया जाये जिसे पूर्ण उपनिवेश का दर्जा प्राप्त हो। युद्ध के पश्चात प्रांतीय वेवस्थापिकाओ के निचले सदनों द्वारा अनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर एक संविधान का निर्माण करेगी। गाँधी जी ने क्रिस्प योजना के बारे में कहा की यह एक आगे की तारीख का चेक था जिसमे जवाहरलाल नेहरू ने जिसका बैंक नष्ट होने वाला था।

* भारत छोड़ो आंदोलन

8 अगस्त 1942 में, गांधी ने 'भारत छोड़ो' आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन के कारण पूरे भारत में व्यापक प्रसार विकार और कई हिंसक प्रदर्शन हुए। गांधी और कांग्रेस के अन्य शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। उस अवधि के दौरान उनकी पत्नी का निधन हो गया और गांधीजी को भी मलेरिया के गंभीर हमले का सामना करना पड़ा। उनके बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए, मई 1944 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें जेल से रिहा कर दिया।

द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में, ब्रिटेन विजयी हुआ और जब 1945 में आम चुनाव हुए, तो लेबर पार्टी सत्ता में आई और एटली प्रधानमंत्री बने। उन्होंने वादा किया कि भारत में जल्द ही एक स्व-सरकार उपलब्ध कराई जाएगी। इंग्लैंड से एक समिति आई और भारत के नेताओं के साथ स्वतंत्र भारत के भविष्य के बारे में चर्चा हुई लेकिन कांग्रेस और मुस्लिम नेताओं के बीच मतभेद के कारण ये बैठकें विफल रहीं।

इसी समय गाँधी जी ने लोगो को करो या मरो का नारा दिया था।

* भारत को स्वतंत्रता मिली

1947 में अंततः भारत को स्वतंत्रता मिली, लेकिन जिन्ना की दृढ़ता के कारण, देश का विभाजन भारत और पाकिस्तान में हो गया। विभाजन ने हिंदू और मुसलमानों के बीच बड़ी मात्रा में रक्तपात किया। पूरी गाथा के दौरान, गांधी ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एकता को बढ़ावा देने के लिए अथक परिश्रम किया और नव बदमाश देश पाकिस्तान को सहायता प्रदान करने के लिए भारतीय सरकार को बढ़ावा देने के लिए उपवास रखा। इसने हिंदुओं को गांधी की हत्या की हद तक नाराज कर दिया।

* गाँधी जी की हत्या

30 जनवरी 1948 जनवरी को एक दर्शन सभा के दौरान उन्हें नाथू राम गोडसे ने गोली मार दी थी। उसी समय उन्होंने वहा प्राण त्याग दिया था।